Saturday, October 22, 2016

इस्लाम पर्दे का हुक्म क्यों देता हैं? पेश हैं एक वैज्ञानिक रिपोर्ट


बेशक इस्लाम औरत को हुक्म देता हैं कि वह पर्दे में रहे। दुनिया के सामने अपने जिस्म और खूबसूरती की नुमाइश (प्रदर्शन) न करें सिवाय उसके शौहर (पति) के। क्यों इस्लाम ने सिर्फ औरतों को ही पर्दे में रहने का हुक्म दिया? क्यों सारी पाबंदियां सिर्फ औरतों के लिए ही हैं? क्यों मर्दों के लिए इस्लाम पर्दे का हुक्म नहीं देता? क्यों इस्लाम में मर्दों पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं हैं? लगता हैं इस्लाम एक पुराना और रूढ़िवादी धर्म हैं।

कुछ अज्ञानी लोग बिना इस्लाम को पढ़े और समझें इस्लाम पर इस तरह के बेहूदा इल्जाम लगाने से नहीं चूकते। हालांकि इससे इस्लाम को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस्लाम का प्रत्येक कानून प्रत्येक कसौटी (criterion) पर खरा उतरता हैं चाहे वो सामाजिक कसौटी (Social criterion) हो, तार्किक कसौटी (logical criterion) हो या फिर वैज्ञानिक कसौटी (Scientific criterion) हो। फिर भी इन बेतुके सवालों के जवाब देने जरूरी हैं ताकि सच्चाई सबके सामने आ सकें।
इस्लाम में पर्दे का हुक्म सिर्फ औरतों के लिए ही नहीं बल्कि मर्दों के लिए भी हैं। जैसा कि कुरान ए पाक में लिखा है;

“ऐ नबी (मुहम्मद साहब स.अ.व.) कह दो मोमिन (मुसलमान) मर्दों से की अपनी नजरें नीची रखे और अपनी शर्मगाहो (शरीर के खास अंगों) की हिफाजत करें, ये उनके लिए बेहतर हैं” 
कुरान (24 :30)

कुरान की इस आयत के जरिये अल्लाह (ईश्वर) मुसलमान मर्दों को यह हुक्म दे रहा है कि वे अपनी नजरें नीची रखे और अपनी शर्मगाहो (शरीर के खास अंगों) की हिफाजत करें क्योंकि इसी में उनकी भलाई हैं। यहाँ नजरें नीची रखने का ताल्लुक (सम्बन्ध) पर्दे से ही हैं पर कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता हैं कि नजरें नीची रखने से पर्दा कैसे हुआ? तो आइये इस सवाल का जवाब हम विज्ञान से ही पूछ लेते हैं क्योंकि हो सकता हैं कि इस्लाम के तर्क (logics) को कुछ लोग कुबुल ना करे हालांकि हकीकत तो यह हैं कि जो भी विज्ञान आज बता रहा हैं इस्लाम 1500 साल पहले ही बता चुका हैं। ये मै अपने Articles (लेखों) द्वारा साबित भी कर चुका हूँ।
अमेरिका की एक मशहूर Anthropologist (मानव विज्ञानी) जिसका नाम Helen Fisher हैं पिछले 30 सालों से Rutger University, America में Anthropology (मानव विज्ञान) की professor हैं और Human Behaviour (मानव व्यवहार) पर रिसर्च कर रही हैं और इसी विषय पर कई किताबें भी लिख चुकी हैं। उसने अपने रिसर्च से बताया कि इन्सान के शरीर में कुछ हार्मोन (hormones) होते हैं जैसे Testosterone और Estrogens और दिमाग में कुछ neurotransmitters (रसायन) होते हैं जैसे Dopamine और Serotonin और ये औरतों की तुलना में मर्दों में ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं जो किसी भी व्यक्ति के व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।


और वह कहती हैं कि जब भी किसी मर्द की नजर किसी औरत पर पड़ती हैं तो ये हार्मोन और रसायन active (सक्रिय) हो जाते हैं और फिर मर्द उस औरत को देखकर उत्तेजित हो जाता हैं। और ऐसा तब होता हैं जब या तो औरत बहुत खूबसूरत (Charming) हो या उसका जिस्म का उभार (Figure) दिखाई देता हो। और ऐसा सिर्फ इन्सानो में ही नहीं बल्कि पक्षियों और जानवरों में भी होता हैं। आपने सुना भी होगा और देखा भी होगा कि जब कोई हाथी पागल हो जाता है तो वह तबाही मचाने लग जाता हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि वह हाथी पागल नहीं होता है वह तो ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसमें Testosterone की मात्रा बहुत बढ़ जाती हैं।

इसी तरह एक शेर दूसरे शेरों के बच्चों को मार देता है ताकि शेरनी उसकी तरफ (Mating) के लिए आकर्षित हो जाए। और सभी प्रकार के नर जानवर मादा को पाने के लिए एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। John Hopkins University के वैज्ञानिकों ने पक्षियों के व्यवहार पर रिसर्च किया और मालूम किया कि नर पक्षी गाना गाते हैं मतलब अलग अलग तरह की आवाजें निकालते हैं ताकि वे मादा पक्षियों को आकर्षित कर सकें।
तो विज्ञान के मुताबिक औरतों (मादाओं) के जिस्म और खूबसूरती को देखकर मर्द (नर) उत्तेजित हो जाते हैं। अगर मर्दों को औरतों की तरफ आकर्षित होने से रोकना है तो औरतें अपनी खूबसूरती व जिस्म को पर्दे में रखें और मर्द भी औरतों को न घुरे तो कुरान में अल्लाह (ईश्वर) ने हमें यही तो हुक्म दिया हैं कि मुसलमान औरतें अपने आप को पर्दे में रखे और मुसलमान मर्द अपनी नजरें नीची रखे मतलब औरत को न घुरे। तो यह साबित हो गया कि इस्लाम ने सिर्फ औरतों को ही नहीं बल्कि मर्दों को भी पर्दा करने का हुक्म दिया हैं और इसी में इन्सानो की भलाई हैं।

ISLAM


भेड़ियों ने बकरियों के हक़ में एक जुलूस निकाला
कि बकरियों को आज़ादी दो,
बकरियों के हुक़ूक़ मारे जा रहे हैं,
उन्हें घरों में क़ैद कर के रखा गया है.
एक बकरी ने जब यह आवाज़ सुनी तो दूसरी बकरियों से कहा कि
सुनो सुनो हमारे हक़ में जुलूस निकाले जा रहे हैं,
चलो हम भी निकलते हैं और अपने हुक़ूक़ की आवाज़ उठाते हैं.
एक बूढ़ी बकरी बोली,
बेटी होश से काम लो,
यह भेड़िये तुम्हारे दुश्मन हैं, इनकी बातों में मत आओ.
मगर नौजवान बकरियों ने उसकी बात न मानी
और कहा कि अरे आपका ज़माना और था,
यह माडर्न ज़माना है,
अब कोई किसी के हुक़ूक़ नहीं छीन सकता.
यह भेड़िये हमारे दुश्मन कैसे हो सकते हैं,
यह तो हमारे हुक़ूक़ की बात कर रहे हैं,
हमारी आज़ादी की आवाज़ उठा रहेहैं.
यह सुनकर बूढ़ी बकरी बोली, बेटा यह तुम्हें बर्बाद करना चाहते हैं,
तुम्हारी इज़्ज़तों से खेलना चाहते हैं,
अभी तुम महफ़ूज़ हो.
अगर तुम इनकी बातों में आ गईं तो यह तुम्हें चीर फाड़ कर रख देंगे.
बूढ़ी बकरी की यह बात सुनकर जवान बकरी ग़ुस्से में आ गई और कहने लगी, अम्मा तुम तो बूढ़ीहो चुकी हो,
अब हमें हमारी ज़िंदगी जीने दो, तुम्हें क्या पता कि आज़ादी क्या होती है.
बाहर ख़ूबसूरत खेत होंगे, हरे भरे बाग़ होंगे,
हर तरफ़ हरियाली होगी, ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ होंगी. तुमअपनी नसीहत अपने पास रखो.
अब हम और यह क़ैद बर्दाश्त नहीं कर सकते.
यह कह कर सब जवान बकरियाँ आज़ादी आज़ादी के नारे लगाने लगीं
और भूख हड़ताल कर दी. बकरियों के मालिक ने जब यह सूरते हाल देखी तो मजबूरन उन्हें खोलकर आज़ाद कर दिया.
बकरियाँ बहुत ख़ुश हुईं और नारे लगाती छलाँगें मारती निकल भागीं.
मगर यह क्या ?
भेड़ियों ने तो उन पर हमला कर दिया और मासूम बकरियों को चीर फाड़ कर रख दिया.
आज औरतों की आज़ादी की बात करने वाले दर हक़ीक़त औरतों तक पहुंचने की अपनी आज़ादी चाह रहे हैं.
यह हवस के प्यासे हैं.
यह सारा खेल हुकूमतों को चलाने वाले उन सरमायेदारों का है जो अपनी तिजोरियाँ भरने के लिये औरतों को इस्तेमाल करना चाहते हैं.
अपने प्रोडक्ट्स की माडलिंग के लिये,
अपने आफ़िस और शोरूम में कस्टमर को खींचने के लिये औरतों को आगे करना चाहते हैं. अब अगर औरतें अपने घरों में रहेंगी
तो इनके मंसूबों पर पानी फिर जाएगा.
इसलिये यह सरमायेदार औरतों को घरों सेबाहर निकालने के लिये उनके हुक़ूक़ और आज़ादी की झूठी बाते करते हैं.
.जो लोग लडकी को पेट में ही मार देते है वही लोग आज केह रहे है की इस्लाम औरतो को उनके अधिकार नही देता ..
.इस्लाम वो मज़हब है जो बेटी को पेट मे मारने की इजाजत नही देता हे ....
इस्लाम में औरत के पेरो के नीचे जन्नत का दरजा है ..
.ये मज़हब है इस्लाम .....
काश कि कोई समझे !!

Friday, October 7, 2016

Surgical Strike


कांग्रेस पार्टी देश की रक्षा- सुरक्षा पर राजनिती नही करती !
यही फर्क है भाजपा और कांग्रेस में...

Wednesday, October 5, 2016


Sahabuddin



टाडा केस में संजय दत्त को सजा मिली /हर महीने पेरोल पर घर छूट्टी मनाने आते थे /पांच साल की सजा और दो साल में जेल से बाहर /नवजोत सिंह सिधु को दस साल की सजा जेल से बाहर /सूरज भान सिंह को ए पी पी राम नरेश शर्मा के हत्या मामले में उम्र क़ैद जेल से बाहर /पप्पू यादव को उम्र क़ैद सुप्रीम कोर्ट से बरी और जेल से बाहर /छोटे सरकार आनंद सिंह को हाई कोर्ट से कई मुक़दमें में मिल चुकी ज़मानत /मुन्ना शुक्ला /राजन तिवारी को कई संगीन मामले में ज़मानत /बी जे पी के अमित शाह /लाला कृष्ण आडवानी /साध्वीप्रज्ञा को कोर्ट से ज़मानत /सहित देश के सैकड़ों हिस्ट्री शीटर का हाई कोर्ट /सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत दिया
और जेल से छूटे किसी भी नेशनल और रिजनल इलेक्ट्रोनिक चैनल और हिंदी प्रिंट मीडिया के पेट में दर्द नहीं हुआ ,और अब जबकि मोहम्मद शहाबुद्दीन साहब ग्यारह साल तक अदालत में चली लम्बी कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के बाद हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद जेल से छूटे थे और फिर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जमानत रद्द कर दिया गया l मैं इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आप सभी देशवासियों से ये सवाल करता हूँ की इस देश में कानून सभी के लिए बराबर है या कुछ अलग , आज मुझे आप सभी लोगों का इस मुद्दे पर स्पष्ट राय चाहिए l